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सरकार किसानों को भ्रमाने में लगी हैः रालोसपा

पंचतत्व में विलिन हुए मिथिला पेंटिंग के संगीता झा

मिथिला पेंटिंग के संगीता झा जिनका उम्र 38 वर्षीय कहा जाता है।अब नही रही जिस से पूरा गाँव मे शोक का माहौल...

सरकार किसानों को भ्रमाने में लगी हैः रालोसपा

  पटना, 10 फरवरी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने में...

कृषि कानूनों को कुछ सालों के लिए स्थगित करने के पक्ष में नहीं हैं बिहार के किसानः रालोसपा

पटना, 9 फरवरी. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के किसान चौपाल में किसान खुल कर अपनी बात कह रहे हैं....

 

पटना, 10 फरवरी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने में लगी है. कृषि कानून किसानों के हित में नहीं है और इससे किसानों के अलावा आम लोगों की परेशानी भी बढ़ेगी. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के किसान चौपाल में पार्टी नेताओं ने किसानों को इन कृषि कानूनों के सच को बता कर सरकार के झूठ को सामने रखा. रालोसपा ने किसानों और दूसरे वर्ग से जुड़े लोगों को किसान कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के फैलाए जा रहे झूठ को सामने रखा और बताया कि कृषि कानूनों की सच्चाई लोगों को नहीं बता रही है बल्कि झूट फैला कर किसानों को भ्रमा रही है. चौपाल के नौवें दिन बिहार के विभिन्न जिलों में आयोजित किसान चौपाल में रालोसपा नेताओं ने किसानों से संवाद स्थापित किया और इन काले कानूनों से होने वाले नुकसान की जानकारी दी. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता फजल इमाम मल्लिक और प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता धीरज सिंह कुशवाहा ने प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी. प्रेस कांफ्रेंस में युवा रालोसपा अभियान समिति के अध्यक्ष अभिषेक कुशवाहा, शिक्षा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मयंक ठाकुर, कार्यालय प्रभारी अशोक कुशवाहा, प्रदेश महासचिव राजदेव कुशवाहा, भुनेश्वर कुशवाहा, किसान प्रकोष्ठ के प्रधान महासचिव रामशरण कुशवाहा और राजेश सिंह भी मौजूद थे.
प्रेस कांफ्रेंस में मल्लिक व धीरज ने कहा कि रालोसपा नेता किसानों को बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्री कहते हैं कि सरकार की नजर सीमांत कृषकों पर हैं जो छोटी जोत के किसान हैं. लेकिन प्रधानमंत्री यह नहीं बताते कि खुले बाजार से सीमांत कृषकों को क्या लाभ होगा. हालांकि सरकार कहती है कि छोटे सीमांत किसान सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था भी नहीं कर पाते तो फिर सवाल यह है कि फसल बेचने के लिए वे एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश कैसे जाएंगे. रालोसपा ने सवाल किया कि किसानों के लिए सिंचाई के साधनों का विकास, बीजों की उपलब्धता और यूरिया का इंतजाम ज्यादा महत्त्वपूर्ण है या फिर खुले बाजार और मंडी की समाप्ति. किसान चौपाल में पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार इन सवालों का जवाब नहीं दे रही है और लोगों को भ्रमाने में लगी है. बिहार में किसानों को जागरूक बनाने और देश भर में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में रालेसपा राज्यव्यापी किसान चौपाल कार्यक्रम चला रही है. किसान चौपाल दो फरवरी को शुरू हुआ और 28 फरवरी तक त़क यह जारी रहेगी. दोनों नेताओं ने बताया कि करीब दो हजार गांवों में अब तक किसान चौपाल लगाई जा चुकी है.   
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के किसान चौपाल में किसान खुल कर अपनी बात कह रहे हैं. वे न सिर्फ इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं बल्कि सरकार के उस प्रस्ताव को भी ठीक नहीं मान रहे हैं जो सरकार ने किसानों के सामने रखा था. सरकार ने कृषि कानूनों को देढ़ साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव किसान संगठनों को दिया था, बिहार के किसान इसे सही नहीं मान रहे हैं. रालोसपा के राज्यव्यापी किसान चौपाल में किसान सरकार के संशोधन के प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं और इसे भ्रमाने वाला मान रहे हैं. किसानों का कहना है कि दरअसल सरकार ऐसा कर किसान आंदोलन को खत्म करने की साजिश रच रही है. किसानों ने चौपाल में अपने मन की बात कही और कहा इस तरह की बात कर सरकार किसानों के आंदोलन को कमजोर करने में लगी है. दोनों नेताओं ने बताया कि बिहार के किसान ने न्यूतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाए जाने के पक्ष में हैं, उनका मानना है कि इससे बिहार के किसान को फायदा होगा. 
किसान चौपाल की जानकारी देते हुए पार्टी नेताओं ने कहा कि किसान चौपाल के जरिए पार्टी किसानों को इन कानूनों के सच उजागर करने में कामयाब हो रही है. मल्लिक और धीरज ने बताया कि इन कृषि कानूनों में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसानों का भला हो. ये कानून अगर पूरी तरह से लागू हो गए तो किसान अपने खेत पर ही मजदूरी करने के लिए मजबूर हो जाएगा. रालोसपा की किसान चौपाल शनिवार को गोपालगंज, बक्सर, मधुबनी, व मोतिहारी जिलों में लगाई गई. एक हफ्ते में करीब बीस जिलों में चौपाल लगाई जा चुकी है. अगले कुछ दिनों में समस्तीपुर, गोपालगंज, पटना पूर्वी, सीतामढ़ी, मोतिहारी, कैमूर, बक्सर व किशनगंज जिलों के करीब दो हजार गांवों में किसान चौपाल लगाई जाएगी.
रालोसपा इन कानूनों की खामियों की चर्चा पार्टी के कार्यक्रम किसान चौपाल में कर रही है और किसानों व आम लोगों को बता रही है कि तीन कृषि कानून दरअसल किसानों के लिए डेथ वारंट है. इन कानूनों के जरिए केंद्र सरकार किसानों को गुलाम बनाने पर तुली हुई है. रालोसपा का किसान चौपाल बिहार में दो फरवरी को काले कृषि कानूनों की प्रतियां जला कर रालोसपा ने किसान चौपाल की शुरुआत की थी.
पार्टी नेताओं ने बताया कि बिहार में किसान जानना चाह रहे हैं कि इन कानूनों में ऐसा क्या है जिससे देश के किसान आंदोलित है और दिल्ली की सीमा पर आंदोलन चल रहा है. किसान इन कानूनों को लेकर रालोसपा नेताओं से सवाल कर रहे हैं और पार्टी के जिला प्रभारी व दूसरे नेता उनके सवालों का जवाब दे रहे हैं और उन्हें इन कानूनों से होने वाले नुकसान की जानकारी भी दे रहे हैं. पार्टी नेता और कार्यकर्ता गांवों के अलावा शहरों में भी बुद्धीजिवियों और छात्रों के अलावा समाज के वंचित तबके के बीच जाकर इन कानूनों की सच्चाई सामने रख रहे हैं और बता रहे हैं कि यह कानून किसानों को गुलाम बनाने वाला है. इससे किसानों के साथ-साथ समाज के दूसरे तबके का अहित होगा. किसान चौपाल बिहार के हर जिले में लगाई जा रही है और 28 फरवरी तक रालोसपा का यह कार्यक्रम चलेगा. रालोसपा ने दस हजार गांवों में किसान चौपाल लगाने का लक्ष्य तो रखा ही है इसके अलावा 25 लाख किसानों तक पहुंच कर इन कानूनों की जानकारी और जागरूक बनाने का भी लक्ष्य रखा है. 
 
फ़ज़ल इमाम मल्लिक / धीरज सिंह कुशवाहा
रालोसपा, केंद्रीय कार्यालय, पटना.
 

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